Wednesday, September 1, 2010

माँ दुर्गा के मंत्र


पापनाश तथा भक्ति की प्राप्ति के लिये
नतेभ्यः सर्वदा भक्तया चण्डिके दुरितापहे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

  स्वर्ग और मोक्ष की प्राप्ति के लिये
सर्वभूता यदा देवि स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।
त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥

माँ दुर्गा के मंत्र


  स्वप्न में सिद्धि-असिद्धि जानने के लिये
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके।
मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥

  प्रबल आकर्षण हेतु
"ॐ महामायां हरेश्चैषा तया संमोह्यते जगत्,
ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।"   

माँ दुर्गा के मंत्र


माँ दुर्गा के लोक कल्याणकारी सिद्ध मन्त्र

  बाधामुक्त होकर धन-पुत्रादि की प्राप्ति के लिये
"सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:॥


  सब प्रकार के कल्याण के लिये
"सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"  

  दारिद्र्य-दु:खादिनाश के लिये
"दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥"  



  वित्त, समृद्धि, वैभव एवं दर्शन हेतु
"यदि चापि वरो देयस्त्वयास्माकं महेश्वरि।।
संस्मृता संस्मृता त्वं नो हिंसेथाः परमापदः।
यश्च मर्त्यः स्तवैरेभिस्त्वां स्तोष्यत्यमलानने।।
तस्य वित्तर्द्धिविभवैर्धनदारादिसम्पदाम्।
वृद्धयेऽस्मत्प्रसन्ना त्वं भवेथाः सर्वदाम्बिके।।

शनिवार व्रत की आरती


 शनिवार व्रत की आरती
आरती कीजै नरसिंह कुंवर की। वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी।।
पहली आरती प्रहलाद उबारे। हिरणाकुश नख उदर विदारे।।
दूसरी आरती वामन सेवा। बलि के द्वार पधारे हरि देवा।।
तीसरी आरती ब्रह्म पधारे। सहसबाहु में भुजा उखारे।।
चौथी आरती असुर संहारे। भक्त विभीषण लंक पधारे।।
पांचवी आरती कंस पछारे। गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले।।
तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा। हरषि-निरखि गावें दास कबीरा।।