Wednesday, September 1, 2010

शनिवार व्रत की आरती


 शनिवार व्रत की आरती
आरती कीजै नरसिंह कुंवर की। वेद विमल यश गाऊं मेरे प्रभुजी।।
पहली आरती प्रहलाद उबारे। हिरणाकुश नख उदर विदारे।।
दूसरी आरती वामन सेवा। बलि के द्वार पधारे हरि देवा।।
तीसरी आरती ब्रह्म पधारे। सहसबाहु में भुजा उखारे।।
चौथी आरती असुर संहारे। भक्त विभीषण लंक पधारे।।
पांचवी आरती कंस पछारे। गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले।।
तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा। हरषि-निरखि गावें दास कबीरा।।

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