जिसके लिए चले थे घर छोड़कर हम
दुनिया के रंगीन सपने संजोकर हम
सोचा कदम दर कदम अपनी मोहब्बत का फल्सफा दुनिया को बताएंगे
जीने की एक नयी राह दुनिया को दिखायेंगे
वो जिसके लिए चले थे हम माँ का आंचल छोड़कर
भूल गए थे माँ के दूध का कर्ज
बाप के खून का कर्ज
वो .....वो जब हमसे मिली तो कहने लगी
दिल्लगी की थी हमने तो टीनएज मैं
तुमने दिल की लगी की तो हम क्या करें
जाओ लौट जाओ अपनी जिंदगी मैं और
याद रखना यदि कभी भूले से भी हम नजर आ जाये
तो राह बदल देना तुम अपनी हमें तुम जैसे लोग
से नजर मिलाना पसंद नहीं
जिसके लिए चले थे घर छोड़कर हम
दुनिया के रंगीन सपने संजोकर हम
उन्हें अब हमसे मतलब नहीं