Thursday, August 19, 2010

वो मुझे दोस्त कहता गया
मैं उसके वादो को प्यार समझता गया
झूठी उमीदो पर प्यार की मंजिल खड़ा करता गया
वो करता रहा मुझसे दगा
और मैं नादानी समझता गया
जो था  मेरे पास उसको देने के लिए
उसे बिना बताएं देता गया
 

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